कवर्धा विशेष

कबीरधाम : 48 नर्सरियों से महिला समूहों को आजीविका, लखपति दीदी विजन को मिलेगी रफ्तार

कवर्धा। कबीरधाम जिले में महिलाओं को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत जिले में 48 नर्सरियां विकसित की जाएंगी, जिनका संचालन पूरी तरह महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपा जाएगा। यह पहल प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के लखपति दीदी विजन को जमीन पर उतारने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

कलेक्टर ने दिए क्रियान्वयन के निर्देश

समय सीमा बैठक में कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा ने इस योजना को प्राथमिकता देते हुए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और जिला पंचायत सीईओ को तुरंत ग्राम चयन और क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी। उन्होंने साफ कहा कि प्रत्येक नर्सरी को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किया जाए और पौधों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान रहे।

“महात्मा गांधी नरेगा से कबीरधाम जिले में 48 नर्सरियां विकसित की जाएंगी। इनका संचालन महिला स्व-सहायता समूह करेंगे, जिससे उन्हें स्थायी आय का नया साधन मिलेगा। नर्सरियों में फलदार और ग्राफ्टेड पौधे तैयार होंगे, जिनका उपयोग पंचायतों में रोपण और बिक्री दोनों के लिए होगा। यह पहल लखपति दीदी विजन को साकार करते हुए महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ी उपलब्धि साबित होगी।”
कलेक्टर गोपाल वर्मा, जिला कबीरधाम

क्लस्टरवार नर्सरी का विकास

जिले के चारों विकासखण्ड – कवर्धा, पंडरिया, बोड़ला और सहसपुर लोहारा – में 3-3 क्लस्टर बनाए गए हैं।
कुल 12 क्लस्टरों में 4-4 नर्सरी विकसित होंगी।

  • जनपद पंचायत कवर्धा: कवर्धा, बिरकोना, रवेली, मरका
  • जनपद पंचायत बोड़ला: राजानवागांव, पोड़ी, रेंगाखरकला, बैजलपुर
  • जनपद पंचायत पंडरिया: कुंडा, कुकदूर, किशुनगढ़, पांडातराई
  • जनपद पंचायत सहसपुर लोहारा: उड़ियाकला, बिडोरा, बाजार चारभांटा, रणवीरपुर

इन नर्सरियों में फलदार पौधों के साथ-साथ सब्जी उत्पादन के लिए ग्राफ्टेड पौधे भी तैयार होंगे।

महिलाओं को स्थायी आजीविका

  • नर्सरी संचालन से महिला समूहों को पौधों की बिक्री से आय अर्जित होगी।
  • स्थानीय स्तर पर पौधों की आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
  • सब्जी उत्पादन और अन्य गतिविधियों से अतिरिक्त आय का मार्ग खुलेगा।
  • हजारों ग्रामीण परिवारों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

यह पहल एक पेड़ माँ के नाम अभियान से भी जुड़ी है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा और महिलाओं की भागीदारी विकास कार्यों में और मजबूत होगी।


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